LucknowNews:राजधानी लखनऊ से एक चौकाने वाली खबर सामने आई है जिसमे शहर की सड़कों पर सफाई के दावे भले ही चमक रहे हों, लेकिन स्वच्छता अभियान के अंदर घुसा भ्रष्टाचार सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, नगर निगम के स्वच्छता अभियान में कार्यरत रैमकी कंपनी के कर्मचारी केवल कागजों पर ही काम कर रहे हैं, जबकि वास्तविक सफाई का कार्य बिल्कुल नहीं किया जा रहा।
जानकारी के मुताबिक, बाहरी कर्मचारियों के नाम लिस्ट में दर्ज कर उनके एचआर द्वारा धनराशि निकाल ली जाती है। लेकिन हाजिरी दर्ज कराने वाला कोई भी कर्मचारी वास्तविक सफाई नहीं करता। शहर की सफाई व्यवस्था इस तरह केवल कागजों पर सिमट कर रह गई है, जबकि धनराशि को कंपनी के कुछ प्रमुख कर्मचारी आपस में बांट लेते हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, कम्पनी का एचआर और जोनल अधिकारी नियमित समय पर कार्यस्थल पर नहीं आते हैं। हाल ही में फर्जी कर्मचारी रखने और पैसे निकालने के संदेह पर जोन 06 से जोन 04 स्थानांतरण किया गया।
सूत्रों ने यह भी बताया कि नगर निगम की तरफ से चलाए जा रहे स्वच्छता अभियान को कंपनी के कर्मचारी लगातार पलीता लगा रहे हैं। सरकारी दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं और शहर के नागरिकों की उम्मीदों पर पानी फेर रहे हैं।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर आयुक्त महोदय ने संज्ञान लिया है और जांच का आदेश दिया गया है। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जानकारों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए गए, तो यह घटना लखनऊ के स्वच्छता अभियान की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा करेगी। नगर निगम को अब पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी ताकि शहर की सफाई केवल कागजों तक सीमित न रहे और नागरिक वास्तविक सफाई का लाभ महसूस कर सकें।
लखनऊ के नागरिक अब निगरानी बढ़ाने की मांग कर रहे हैं और उम्मीद है कि अधिकारियों की कार्रवाई से भविष्य में किसी भी तरह के भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी।













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