LucknowNews: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में उत्तर पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPTCL) के कर्मचारियों और अधिकारियों द्वारा चिकित्सा प्रतिपूर्ति मामलों में गंभीर लापरवाही और मनमानी बरतने के आरोप सामने आए हैं। माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश के आदेशों के बावजूद कई पत्रावलियां लंबे समय तक लंबित रखी जा रही हैं, जिससे कर्मचारियों को शारीरिक और मानसिक तनाव झेलना पड़ रहा है।
सूत्रों के अनुसार, जो भी पत्रावलियां माननीय सांसद या विधायक के द्वारा भेजी जाती हैं, उन्हें दबा कर रखा जाता है और कोई कार्यवाही नहीं की जाती। इस मामले में 12 दिसंबर 2025 को भारतीय जनता पार्टी के एक विधायक द्वारा पत्र भेजा गया था, लेकिन इसे अनदेखा किया गया।
अधिशासी अभियंता, उपसचिव और बाबू जो कि चिकित्सा प्रतिपूर्ति मामलों को देखने के जिम्मेदार हैं, पर भी गंभीर लापरवाही के आरोप हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन अधिकारियों के कुछ कर्मचारी दिन में मदिरा का सेवन करते हैं और रात में भी कार्य में लापरवाही बरतते हैं।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि अधिशासी अभियंता विद्युत पारेषण खंड-प्रथम लखनऊ नियमों के विपरीत लंबे समय से कार्यरत हैं। वे अक्सर अपनी पार्टी में शक्ति प्रदर्शन करते हैं और अवर अभियंताओं को अपने आगे कुछ भी समझने नहीं देते।
चिकित्सा प्रतिपूर्ति मामलों की जांच में एक से लेकर पांच तक के बिंदुओं पर लापरवाही और मनमानी को साक्ष्य सहित दर्शाया गया है। इस तरह की स्थिति से कर्मचारियों का विश्वास प्रशासन पर कमजोर हुआ है और जनता के लिए भी यह चिंता का विषय है।
UPPTCL के चेयरमैन से सवाल उठता है कि ऐसे दोषियों पर कब कार्यवाही की जाएगी। शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि कोई भी पत्रावली तीन से अधिक सप्ताह तक लंबित नहीं रहनी चाहिए, लेकिन इसके बावजूद मामले दबाए जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार बता दे कि समय पर कार्यवाही और पारदर्शिता ही कर्मचारियों और जनता के विश्वास को बनाए रखने का तरीका है। इस प्रकरण में दोषियों के खिलाफ ठोस कदम उठाना जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसे मामले न दोहराएं।














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