बताया जा रहा है कि गांव में दो सरकारी तालाब दर्ज हैं, जिनमें से एक तालाब को पूरी तरह पाटकर उस पर पक्का मकान खड़ा कर दिया गया है। हैरानी की बात यह है कि सरकार द्वारा तालाबों के सौंदर्यीकरण के आदेश भी जारी किए गए थे, इसके बावजूद इस तरह का अवैध निर्माण प्रशासन की आंखों के सामने होता रहा और किसी ने रोकने की कोशिश नहीं की।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सब तहसील प्रशासन और नगर निगम की लापरवाही या मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद अधिकारियों ने इस मामले को नजरअंदाज किया, जिससे भू–माफियाओं के हौसले और बुलंद हो गए।
इस पूरे मामले में प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिस जमीन पर तालाब होना चाहिए था, वहां अब आलीशान मकान खड़ा है, जो सरकारी संपत्ति पर खुलेआम कब्जे की कहानी बयां कर रहा है।
फिलहाल, मामले के सामने आने के बाद जांच की मांग तेज हो गई है। उम्मीद की जा रही है कि तहसील प्रशासन और नगर निगम इस पूरे प्रकरण की जांच करेंगे और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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