UPNews: राजेसुल्तानपुर थाने में पुलिसकर्मियों की कथित निष्क्रियता के कारण दो परिवारों की जिंदगी प्रभावित हुई। स्थानीय लोगों और पीड़ितों के मुताबिक, थाना में तैनात दरोगा अजय सिंह के कारनामों ने मानवता को शर्मसार कर दिया।
घटना की शुरुआत तब हुई जब एक युवती और उसकी मां ने थाना राजेसुल्तानपुर में सुरक्षा की गुहार लगाई। शिकायत दर्ज कराने के बावजूद, पुलिस कार्रवाई में असमर्थ या अनिच्छुक दिखाई दी। आरोप है कि युवती को परेशान करने और धमकाने के लिए उसे पीटवाने की घटना सामने आई, जबकि थाने के उच्च अधिकारियों के दखल की कमी रही।
युवती और उसकी मां ने मीडिया को बताया कि थाने में उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया। “हमें ऐसा लगा कि हमारी आवाज़ कोई सुन ही नहीं रहा है। हमारी मदद करने की बजाय हम पर दबाव डाला गया और युवती को पीटवाया गया,” पीड़ितों ने कहा।
स्थानीय नागरिक और मानवाधिकार संगठन भी इस मामले में चिंता जता रहे हैं। उनका कहना है कि अगर पुलिस तंत्र सक्रिय और संवेदनशील होता, तो शायद इन परिवारों की जिंदगी इतनी बर्बाद नहीं होती। घटना ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि थाने में तैनात वरिष्ठ अधिकारियों और पुलिस अधीक्षक किस हद तक जिम्मेदार हैं।
इस मामले की जानकारी मिलने के बाद कुछ उच्च अधिकारियों ने जांच की बात कही है। हालांकि अभी तक थाने के तत्कालीन थानाध्यक्ष और दरोगा अजय सिंह के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में पुलिस की निष्क्रियता केवल कानूनी सवाल ही नहीं खड़ा करती, बल्कि समाज में आम नागरिकों का विश्वास भी कमजोर करती है।
इस घटना के बाद स्थानीय लोग न्याय की मांग कर रहे हैं और पुलिस अधीक्षक से सवाल कर रहे हैं कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कब होगी। मानवाधिकार संगठनों ने भी इस मामले को गंभीरता से लेने की अपील की है।
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