Advertisement

BarabankiNews: ट्रैफिक लाइट 5 साल से बंद, जनता फंसी जाम में, अफसर आराम में ,भ्रष्टाचार की लाल बत्ती जल रही

बाराबंकी की ट्रैफिक लाइट का सच

BarabankiNews: बाराबंकी में एक दिलचस्प लेकिन गंभीर सवाल फिर चर्चा में है—क्या हमारा शहर सिर्फ तब ही जागता है जब कोई बड़ा दौरा होता है? जैसे ही मुख्यमंत्री या कोई वरिष्ठ नेता आने वाला होता है, मानो पूरा प्रशासन एक साथ सक्रिय हो जाता है। सड़कें धुल जाती हैं, ट्रैफिक लाइन में आ जाता है, दीवारों पर ताज़ी पुताई हो जाती है, बंद पड़ी लाइटें जल उठती हैं। शहर अचानक चमकने लगता है। उस दिन अगर आप घुमाइए तो लगेगा—यही है “विकसित भारत” की तस्वीर। लेकिन जैसे ही काफिला आगे बढ़ता है, सवाल पीछे छूट जाता है। क्या वही शहर अगले दिन भी उतना ही व्यवस्थित रहता है?

वही बाराबंकी के पल्हरी चौराहा ,सतरिख नाका चौराहा ,लखपेड़ाबाग चौराहे, पटेल तिराहे, एलआईसी मोड़ समेत कई स्थानों पर ट्रैफिक लाइटें लगाई गईं। इन लाइटों ने कुछ दिन तक ठीक से कार्य किया, लेकिन उसके बाद खराब हो गईं। इसके बाद किसी ने ध्यान नहीं दिया।चौराहों पर ट्रैफिक लाइटें लंबे समय से या तो बंद पड़ी हैं या आधी-अधूरी चल रही हैं। नई लाइटें लगती हैं, लेकिन पुरानी व्यवस्था की जवाबदेही तय नहीं होती। हाईवे पर स्ट्रीट लाइटें दिन में जलती रहती हैं और कई बार रात में अंधेरा छाया रहता है। यह केवल बिजली की बर्बादी नहीं—यह निगरानी और जवाबदेही की कमी का संकेत है।

नगर निकाय और संबंधित विभागों को हर साल बजट मिलता है। मेंटेनेंस के नाम पर भुगतान भी होता है। तो फिर जमीनी स्तर पर नियमित सुधार क्यों नहीं दिखता? क्या व्यवस्था कैमरे के लिए सक्रिय होती है और जनता के लिए “स्लीप मोड” में चली जाती है?

यह विरोध नहीं—सवाल है। यह राजनीति नहीं—जवाबदेही की मांग है। क्योंकि जब ट्रैफिक सिस्टम सही नहीं होगा तो दुर्घटनाएँ बढ़ेंगी। जब स्ट्रीट लाइटें मेंटेन नहीं होंगी तो सुरक्षा प्रभावित होगी। और जब बजट का सही उपयोग पारदर्शी नहीं होगा, तो भरोसा कमजोर पड़ेगा।

जरूरत है कि ट्रैफिक व्यवस्था की ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, स्ट्रीट लाइट मॉनिटरिंग सिस्टम की स्पष्ट जानकारी दी जाए और जहां लापरवाही है वहां कार्रवाई हो। विकास सिर्फ पोस्टरों या एलसीडी स्क्रीन पर नहीं दिखता—विकास तब दिखता है जब सड़क हर दिन ठीक रहे, सिर्फ दौरे वाले दिन नहीं।

बाराबंकी इंतज़ार कर रहा है—अगली बार चर्चा शिकायत की नहीं, सुधार की हो। क्योंकि शहर सिर्फ वीआईपी रूट नहीं होता, शहर हर गली, हर चौराहा और हर नागरिक से बनता है।

Readmore:SitapurNews: पावर कॉर्पोरेशन में बड़ा भ्रष्टाचार, इलाज के पैसों पर डाका ..

https://youtu.be/HcOC1kxiFew?si=wdkpA7Rk-DaNqlzZ

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *