Lucknow University Protest: लखनऊ यूनिवर्सिटी का माहौल उस वक्त पूरी तरह बदल गया, जब अचानक सैकड़ों छात्रों ने एकजुट होकर जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया। समाजवादी छात्र सभा के बैनर तले जुटे ये छात्र किसी आम विरोध में नहीं, बल्कि अपने भविष्य की लड़ाई लड़ रहे थे।
समाजवादी छात्र सभा के बैनर तले जुटे छात्र कुलपति से सीधे बात करना चाहते थे। लेकिन जैसे ही वे आगे बढ़े, उन्हें बीच रास्ते में ही रोक दिया गया। कुलपति कार्यालय की ओर जाने वाले रास्ते पर ताला जड़ दिया गया था। यह सिर्फ एक दरवाजा बंद नहीं था, बल्कि छात्रों की आवाज़ को दबाने की कोशिश के रूप में देखा गया। इसके बाद माहौल और भड़क गया—छात्रों ने लोहे के चैनल को पीटना शुरू कर दिया, नारेबाजी तेज हो गई और पूरा कैंपस गूंज उठा।
नाराज़ छात्र लोहे के चैनल को पीटते हुए जोरदार नारेबाजी करने लगे—““फीस वृद्धि वापस लो”, “शिक्षा बिकाऊ नहीं है”और “शिक्षा का निजीकरण बंद करो” जैसे नारे पूरे परिसर में गूंज रहे थे।ऐसे नारों के बीच छात्रों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि विश्वविद्यालय अब शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि एक “कमाई का जरिया” बनता जा रहा है। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना था कि विश्वविद्यालय धीरे-धीरे निजीकरण की राह पर बढ़ रहा है। उन्होंने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि बीकॉम (ऑनर्स) की फीस 28,330 रुपये से बढ़ाकर 40,232 रुपये कर दी गई है। एलएलबी की फीस 25,580 रुपये से बढ़कर 47,330 रुपये हो गई है। इसी तरह बीएससी, बीबीए और बीवीए जैसे कोर्स की फीस में भी भारी इजाफा हुआ है। छात्रों का आरोप है कि यह बढ़ोतरी लगभग दोगुनी है, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
एमए हिंदी के छात्र प्रेम प्रकाश ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि यह फीस वृद्धि छात्रों की कमर तोड़ने वाली है। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन लगातार छात्र विरोधी फैसले ले रहा है। यूजी एंट्रेंस परीक्षा की फीस भी 800 रुपये से बढ़ाकर 1200 रुपये कर दी गई है। उनके अनुसार, शिक्षा अब सेवा नहीं बल्कि व्यवसाय बनती जा रही है। स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब प्रॉक्टर छात्रों को समझाने पहुंचे, लेकिन नाराज़ छात्रों ने उनकी बात सुनने से इनकार कर दिया। छात्रों का कहना था कि उन्होंने पहले भी ज्ञापन देकर अपनी मांग रखी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब वे अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने को मजबूर हैं।
छात्रों का संदेश साफ है—“सस्ती शिक्षा हमारा अधिकार है।” वे चेतावनी दे रहे हैं कि जब तक फीस वृद्धि वापस नहीं ली जाती, उनका संघर्ष जारी रहेगा। यह विरोध सिर्फ फीस का नहीं, बल्कि शिक्षा के भविष्य का सवाल बन चुका है।
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