Lucknow News: लखनऊ में एक बार फिर 69000 शिक्षक भर्ती का मुद्दा सड़कों पर उबाल मारता नजर आया। बुधवार को बड़ी संख्या में अभ्यर्थी राजधानी में जुटे और विधानसभा की ओर कूच कर जोरदार प्रदर्शन किया। यह कोई साधारण विरोध नहीं था, बल्कि उन हजारों युवाओं की आवाज थी जो पिछले कई वर्षों से अपने हक और न्याय की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थी गले में झाड़ू और मटकी लटकाकर पहुंचे, जो उनके भविष्य की अनिश्चितता और मजबूरी का प्रतीक बन गया।
पूरा मामला 69000 सहायक शिक्षक भर्ती से जुड़ा है, जिसे अभ्यर्थी “आरक्षण के साथ बड़ा अन्याय” बता रहे हैं। उनका आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में नियमों को दरकिनार कर आरक्षित वर्ग के हक में कटौती की गई। ओबीसी को जहां 27 प्रतिशत आरक्षण मिलना चाहिए था, वहीं उन्हें बेहद कम हिस्सा दिया गया। इसी तरह एससी वर्ग को भी निर्धारित प्रतिशत से कम आरक्षण मिलने की बात कही जा रही है। अभ्यर्थियों का दावा है कि करीब 19 हजार सीटों पर गड़बड़ी हुई, जिसने हजारों सपनों को अधर में लटका दिया।
इस पूरे विवाद ने कानूनी मोड़ भी ले लिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पहले ही चयन सूचियों को रद्द करते हुए नई सूची जारी करने का आदेश दिया था, लेकिन महीनों बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। वहीं मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि सरकार की ओर से मजबूत पैरवी नहीं हो रही, जिससे न्याय की प्रक्रिया लगातार लंबी खिंचती जा रही है।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए कई अभ्यर्थियों को हिरासत में लिया और इको गार्डन भेज दिया। लेकिन इससे आंदोलन की धार कम नहीं हुई। युवाओं का कहना है कि यह सिर्फ नौकरी की लड़ाई नहीं, बल्कि उनके सम्मान और भविष्य की लड़ाई है। पिछले 6 सालों से वे लगातार संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक ठोस समाधान नहीं निकला।
अभ्यर्थियों की मांग साफ है—भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा किया जाए, नई चयन सूची जल्द जारी की जाए और आरक्षित वर्ग के साथ हुए कथित अन्याय को सुधारा जाए। उन्होंने चेतावनी भी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।













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