LucknowNews: लखनऊ के गोमती नगर जोन में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं। एक उपभोक्ता ने कई महीनों तक बिजली से जुड़ी अपनी शिकायतों का निस्तारण कराने की कोशिश की, लेकिन उसे लगातार फर्जी निस्तारण का सामना करना पड़ा।
उपभोक्ता ने बताया कि उन्होंने 1912 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई, लेकिन विभाग की ओर से हर बार सही समाधान नहीं दिया गया। उनकी शिकायतों का रिकॉर्ड रखने के बावजूद, विभाग ने समस्याओं का वास्तविक समाधान नहीं किया। लगभग 4 बार कंप्लेंट करने के बाद भी उन्हें केवल औपचारिक निस्तारण की जानकारी दी गई, जिससे उपभोक्ता काफी परेशान हैं।
उपभोक्ता ने कहा -एक बार नहीं, बार-बार शिकायत करने के बाद भी फर्जी निस्तारण किया गया। क्या यही वर्टिकल व्यवस्था है? अगर निदान नहीं किया जा सकता, तो उपभोक्ता कहां जाए?” यह मामला न केवल विभाग की जवाबदेही पर सवाल उठाता है, बल्कि उपभोक्ताओं के प्रति उनके रवैये की गंभीर आलोचना भी करता है। गोमती नगर जोन क्षेत्र में ऐसे मामलों से यह स्पष्ट होता है कि शिकायत निस्तारण प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बता दे कि यदि उपभोक्ता लगातार शिकायत कर रहे हैं और उसका समाधान नहीं हो रहा है, तो यह विभाग की कार्यप्रणाली में खामी को दर्शाता है। फर्जी निस्तारण से उपभोक्ताओं का समय, धन और विश्वास दोनों खोता है।
इस स्थिति में यह सवाल उठता है कि विभाग अपनी वर्टिकल व्यवस्था को कैसे सुधार सकता है। यदि शिकायतों का उचित समाधान नहीं किया जाता, तो उपभोक्ता न्याय और समाधान के लिए कहां जाएँ।
गोमती नगर जोन का यह मामला बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक चेतावनी है। विभाग को चाहिए कि वह न केवल शिकायतों को दर्ज करे, बल्कि उनका ठोस और समयबद्ध समाधान भी प्रदान करे। केवल औपचारिकता दिखाने से उपभोक्ताओं का विश्वास कम होता है और उनका विश्वास विभाग पर नहीं रहता।
बिजली विभाग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रभावी शिकायत निस्तारण व्यवस्था सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है ताकि उपभोक्ताओं को न्याय और समाधान मिल सके।
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