Lucknow News: राजधानी लखनऊ के लालबाग इलाके से बिजली व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। विधानसभा क्षेत्र के पास स्थित लालबाग सुपर मार्केट में कथित तौर पर लंबे समय से बिजली आपूर्ति को लेकर “सेटिंग सिस्टम” चलने की चर्चा है। इस पूरे मामले में दारुलशफा उपकेंद्र की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार लालबाग में दयानिधान पार्क के पास स्थित सुपर मार्केट में करीब 500 दुकानें संचालित हैं। बताया जा रहा है कि इन दुकानों में से कई के पास पहले वैध बिजली कनेक्शन नहीं था, क्योंकि उनके पास नगर निगम से आधिकारिक एलॉटमेंट भी नहीं था। नियम के अनुसार ऐसी दुकानों को बिजली कनेक्शन मिलना मुश्किल होता है।
इसके बावजूद दुकानों में लगातार बिजली जलती रही। आरोप है कि यहां कटियामारी यानी अवैध तरीके से बिजली आपूर्ति की जाती रही। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि इस व्यवस्था के बदले प्रति दुकान लगभग 500 रुपये महीना “सेटिंग” के नाम पर वसूले जाते थे। अगर यह दावा सही है, तो हर महीने बड़ी रकम इस पूरे नेटवर्क में घूम रही थी।
इस मामले में नया मोड़ तब आया जब इस कथित वसूली की चर्चा बाहर आने लगी और मामला मीडिया तक पहुंच गया। सूत्रों का कहना है कि इसके बाद अचानक हलचल तेज हो गई। कई दुकानदारों से हलफनामे तैयार कराए गए, जनप्रतिनिधियों की संस्तुति ली गई और अस्थायी दस्तावेजों के आधार पर तेजी से बिजली कनेक्शन जारी होने लगे।
दिलचस्प बात यह है कि जिन दुकानों के पास पहले एलॉटमेंट नहीं था, वे भी अचानक बिजली कनेक्शन के दायरे में आ गईं। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या पहले अवैध वसूली होती रही और बाद में कागजी प्रक्रिया के जरिए उसे वैध बनाने की कोशिश की गई?
अब इस पूरे मामले को लेकर कई अहम सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या दारुलशफा उपकेंद्र स्तर पर जिम्मेदारी तय होगी? क्या इस कथित वसूली की जांच होगी? और अगर आरोपों में सच्चाई है, तो क्या संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई होगी?
फिलहाल ये सभी आरोप सूत्रों के हवाले से सामने आए हैं। आधिकारिक जांच और विभाग की प्रतिक्रिया के बाद ही पूरी सच्चाई स्पष्ट हो पाएगी। लेकिन इतना जरूर है कि राजधानी के बीचों-बीच उठे ये सवाल बिजली व्यवस्था की पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही दोनों पर बहस छेड़ रहे हैं।












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