Lucknow News: बारिश थमने के 36 घंटे बाद भी अगर सड़कें पानी से लबालब हों, दुकानों तक पहुंचना मुश्किल हो और आम आदमी रोजमर्रा के कामों के लिए परेशान हो, तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर शहर के ड्रेनेज सिस्टम की जिम्मेदारी किसकी है? लखनऊ के मटियारी, देवा रोड स्थित शिवपुरी पावरहाउस के पास से लेकर शिवपुरी-हिमसिटी तक सड़क पर जलभराव की समस्या ने स्थानीय लोगों, दुकानदारों और ठेला लगाकर रोजी-रोटी कमाने वालों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
बारिश का पानी सड़कों पर जमा है और जलनिकासी की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सड़क किनारे दुकान लगाने वाले लोगों के लिए यह महज आवागमन की परेशानी नहीं, बल्कि उनकी रोजी-रोटी का सवाल भी है। ग्राहक दुकानों तक नहीं पहुंच पा रहे, वहीं सड़क पर जमा पानी के बीच से गुजरना लोगों के लिए जोखिम और परेशानी दोनों बढ़ा रहा है।
36 घंटे बाद भी पानी नहीं निकला, तो ड्रेनेज सिस्टम किस काम का?
बारिश के बाद जलभराव होना एक बात है, लेकिन बारिश थमने के करीब 36 घंटे बाद भी सड़क पर पानी जमा रहना नगर निगम और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। आखिर जलनिकासी की ऐसी कौन-सी समस्या है, जिसका समाधान समय रहते नहीं हो पा रहा? क्या नालों की नियमित सफाई और जलनिकासी की व्यवस्था की निगरानी ठीक से हो रही है? और अगर व्यवस्था दुरुस्त है, तो फिर आम जनता को इस परेशानी से जूझना क्यों पड़ रहा है?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अधिकारियों को लेकर सख्त कार्रवाई की बात कह चुके हैं। ऐसे में सवाल यह है कि जमीनी स्तर पर उन निर्देशों का कितना असर दिखाई दे रहा है? क्या जिम्मेदार अधिकारियों तक जनता की परेशानी की जानकारी पहुंच रही है, और अगर पहुंच रही है तो समाधान में देरी क्यों हो रही है?
सियासी दावों के बीच जमीन पर जनता की परेशानी
इस समस्या को लेकर हमारी संवाददाता ने पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से भी सवाल किया था। उस दौरान सत्ता पक्ष के समर्थकों की ओर से इलाके में समस्या न होने की बात कही गई थी। लेकिन जब संवाददाता मौके पर पहुंचीं और सड़क पर जमा पानी की स्थिति दिखाई, तो जमीनी हालात ने एक बार फिर इस मुद्दे को चर्चा में ला दिया।
सवाल किसी राजनीतिक दल के दावे का नहीं, बल्कि उस आम नागरिक का है जिसे हर बारिश के बाद इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है। अगर समस्या नहीं है, तो सड़क पर जमा पानी क्या बयां कर रहा है? और अगर समस्या है, तो उसके समाधान की जिम्मेदारी कौन लेगा?
धांवा में सड़क निर्माण शुरू, लेकिन मटियारी-शिवपुरी को राहत कब?
इस पूरे मामले के बीच एक राहत भरी खबर भी सामने आई है। संवाददाता द्वारा आवाज उठाए जाने के बाद धांवा के पास जलभराव से प्रभावित सड़क पर आरसीसी निर्माण का काम शुरू किया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर यह एक सकारात्मक पहल है और उम्मीद की जा रही है कि निर्माण पूरा होने के बाद लोगों को राहत मिलेगी।
लेकिन बड़ा सवाल अब भी कायम है—मटियारी से शिवपुरी और हिमसिटी तक जलभराव की समस्या से लोगों को कब निजात मिलेगी? क्या इस पूरे मार्ग की जलनिकासी व्यवस्था का स्थायी समाधान निकाला जाएगा, या फिर हर बारिश के बाद लोगों को इसी तरह परेशान होना पड़ेगा?
नेताओं के दौरे पर सड़कें चमकती हैं, आम जनता की बारी कब?
जब किसी बड़े नेता का दौरा होता है, तो सड़कों की मरम्मत और व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए तेजी दिखाई देती है। कई बार काम रातोंरात पूरा करने की कोशिश होती है। ऐसे में आम जनता का सवाल है कि यही तत्परता रोजमर्रा की समस्याओं के समाधान में क्यों नहीं दिखाई देती?
नगर निगम और संबंधित विभागों के पास शहर की सड़कों, नालों और जलनिकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी है। बजट और योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी माना जाएगा, जब उसका असर आम लोगों की जिंदगी में दिखाई दे। विकास का मूल्यांकन केवल बड़ी परियोजनाओं या वीआईपी दौरों के दौरान चमकती सड़कों से नहीं, बल्कि उन गलियों और रास्तों से भी होना चाहिए जहां आम नागरिक हर दिन अपनी जरूरतों के लिए निकलता है।
मटियारी-शिवपुरी मार्ग पर जलभराव की समस्या अब सिर्फ बारिश के पानी की कहानी नहीं रह गई है। यह नगर निगम की व्यवस्था, जलनिकासी की तैयारी और जवाबदेही से जुड़ा सवाल बन चुकी है।
अब जरूरत है कि जिम्मेदार विभाग मौके का निरीक्षण करें, जलभराव के कारणों की पहचान करें और स्थायी समाधान की समयसीमा बताएं। क्योंकि सड़क किनारे दुकान लगाने वाले लोगों की आजीविका और आम नागरिकों का सुगम आवागमन किसी भी शहर की बुनियादी जरूरत है।
जनता को आश्वासन नहीं, राहत चाहिए। सवाल वही है—मटियारी से शिवपुरी-हिमसिटी तक रहने वाले लोगों को जलभराव से आखिर कब मिलेगी मुक्ति?
रिपोर्ट: प्रतीक्षा वर्मा | जनमंच समाचार



